सोलन
पवन कुमार सिंघ
बद्दी-नालागढ़ फोरलेन परियोजना की हालत बहुत खराब है, और यह करदाताओं के पैसे की बर्बादी का एक उदाहरण बन गई है। इस परियोजना को अप्रैल 2022 में शुरू किया गया था और इसे 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन मार्च 2025 तक केवल 42% काम ही पूरा हुआ है। इस परियोजना पर अब तक ₹800 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं।
- धीमी प्रगति: परियोजना की प्रगति बहुत धीमी है, जिससे लोगों और उद्योगों को परेशानी हो रही है।
- अधूरी सड़कें: सड़कें अधूरी हैं और जगह-जगह गड्ढे हैं, जिससे यातायात और पैदल यात्रियों के लिए खतरा बढ़ गया है।
- बिजली लाइन और विभागीय समन्वय की कमी: बिजली लाइन को समय पर स्थानांतरित नहीं किया गया, जिससे काम और भी पीछे चला गया।
- 37% डिस्काउंट पर ठेका: ठेका 37% डिस्काउंट पर दिया गया था, जिससे काम की गुणवत्ता पर असर पड़ा।
- दोषारोपण: रेलवे, बिजली, लोक निर्माण और NHAI के बीच दोषारोपण चलता रहा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार की कार्रवाई: - NHAI ने ठेका रद्द किया: NHAI ने गुजरात की कंपनी के साथ करार रद्द कर दिया है और नई निविदा प्रक्रिया शुरू की है।




