January 23, 2026 4:21 pm

श्री रामचरितमानस वह पावन अध्याय है, जिसमें भक्त और भगवान के मधुरतम रहस्य छिपे हुए हैं:साध्वी राधिका भारती

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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा संचालित सात दिवसीय श्री राम कथा के अंतर्गत छठे दिन का आयोजन अत्यंत भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। कथा व्यास सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री राधिका भारती ने भक्त शिरोमणि श्री हनुमान जी के पावन चरित्र एवं सुंदरकांड के अमृतमयी प्रसंगों का अद्भुत महिमा-वर्णन करते हुए उपस्थित भक्तजनों को अध्यात्म की गहन अनुभूतियों से जोड़ दिया।

अपने तेजस्वी एवं ओजस्वी प्रवचनों में साध्वी भारती ने कहा कि सुंदरकांड श्री रामचरितमानस का वह पावन अध्याय है, जिसमें भक्त और भगवान के मधुरतम रहस्य छिपे हुए हैं। इस प्रसंग का नाम ‘सुंदरकांड’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें केवल हनुमान जी के ही स्वरूप ही नहीं, बल्कि उनके संकल्प, साहस, समर्पण और सेवाभाव का सुंदर वर्णन है। यह प्रसंग भक्त के जीवन में प्रकाश, प्रेरणा और अध्यात्म की गहराइयों को खोल देने वाला है।

उन्होंने कहा कि भक्त शिरोमणि हनुमान जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि जब भक्त के भीतर अपने आराध्य के प्रति अटूट विश्वास, अटल निष्ठा और दृढ़ सेवा-भाव उत्पन्न हो जाता है, तब उसके लिए कोई कार्य असंभव नहीं रह जाता। जिस प्रकार श्रीरामकाज को पूर्ण करने हेतु हनुमान जी ने समुद्र पार किया, लंका में प्रवेश किया, सीता माता का पता लगाया और पूरी लंका को हिला देने वाली शक्ति का परिचय दिया — यह सब उनकी ‘भक्ति की शक्ति’ का प्रमाण है।

साध्वी जी ने सुंदरकांड के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सुंदर कांड की प्रत्येक घटना भक्त को भीतर के मार्ग की ओर अग्रसर करती है। समुद्र पार करना केवल भौतिक यात्रा नहीं, बल्कि मन के विकारों के समुद्र को पार करने का संकेत है। लंका में प्रवेश साधक के भीतर की अंधकारमयी प्रवृत्तियों को चुनौती देने का संदेश देता है। माता सीता की खोज आत्मा के उस परम सत्य की खोज है जो हर हृदय के भीतर विद्यमान है। और अंत में, रामदूत बनकर लौटना यह दर्शाता है कि जब साधक सत्य को पा लेता है, तो वह संसार में ‘राम संदेश’ अर्थात् सद्गुण, सत्य और प्रेम का प्रसार करता है।

साध्वी सुश्री राधिका भारती ने यह भी कहा कि आज का मनुष्य जीवन की समस्याओं से घिरा हुआ है। ऐसे समय में सुंदरकांड का नियमित पाठ, श्रवण और मनन व्यक्ति को मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक स्थिरता प्रदान करता है। हनुमान जी का चरित्र हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि भक्ति सच्ची है तो परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, मार्ग अवश्य निकलता है।

उन्होंने उपस्थित संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि भक्तिमार्ग केवल पूजा या प्रार्थना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है — जिसमें विनम्रता, निःस्वार्थ सेवा, गुरु-भक्ति और सदाचार का संगम होता है। सुंदरकांड यही शिक्षा देता है कि जीवन में सेवा और समर्पण ही वह पुल है जो हमें भगवान के निकट ले जाता है।

अंत में, कथा स्थल भजनों की मधुर ध्वनियों और जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। संगत ने सुंदरकांड की इस दिव्य महिमा को आत्मसात करते हुए ध्यान–साधना का अभ्यास किया तथा प्रभु चरणों में अपने भाव अर्पित किए। दिव्य वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखा गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के सेवादारों ने पूर्ण समर्पण से अपनी भूमिका निभाई। संस्थान की ओर से कथा श्रवण का लाभ लेने हेतु सभी भक्तजनों को सपरिवार आमंत्रित किया गया।

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