शिमला से दियोटसिद्ध तक श्री शिव भगवती सेवक मंडल द्वारा आयोजित 50वीं स्वर्ण जयंती के अवसर की ऐतिहासिक पैदल यात्रा श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। पांच दिनों तक चली इस पावन यात्रा में लगभग 80 श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा बालक नाथ जी के जयकारों से पूरा मार्ग भक्तिमय हो उठा। श्री शिव भगवती सेवक मंडल के संयोजक राकेश बीरा जी एवं रघु ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ 10 दिसंबर को शिमला से किया गया, जो देर रात्रि दाड़लाघाट पहुंची। दाड़लाघाट पहुंचने पर दाड़ला मंडली के सदस्यों द्वारा बाबा जी के झंडे सहित श्रद्धालुओं का फूलों की वर्षा कर भव्य एवं भावपूर्ण स्वागत किया गया। 11 दिसंबर को यात्रा दाड़लाघाट से मारकंडेय मंदिर (जुखाला) के लिए रवाना हुई, जहां विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत रात्रि विश्राम किया गया। 12 दिसंबर को यात्रा मारकंडेय मंदिर से बरठीं (जिला बिलासपुर) के लिए प्रस्थान कर शुक्र पुल पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने हनुमान मंदिर में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। 13 दिसंबर को यात्रा बरठीं से शाहतलाई पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पवित्र तीर्थ स्थल शाहतलाई में हाजिरी लगाई। इसके पश्चात यात्रा दियोटसिद्ध के लिए आगे बढ़ी। यात्रा के अंतिम दिन 14 दिसंबर को प्रातःकाल बाबा जी की भव्य चौकी सजाई गई। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने दियोटसिद्ध गुफा में बाबा बालक नाथ जी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का अनुशासन, आपसी सहयोग और भक्ति भाव देखते ही बनता था। यात्रा के सफल समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और आगामी वर्षों में भी इसी श्रद्धा, एकता और उत्साह के साथ यात्रा में भाग लेने का संकल्प लिया।




