सोलन ( पट्टा महलोग )
पवन कुमार सिंघ
दून विधानसभा के अंतर्गत आने वाले पट्टा मेहलोग के कोंटा गांव में जंगली बाघ के आतंक से ग्रामीण परेशान थे। रोशन लाल जो रवाह्न गांवों के निवासी है और बकरी पालन का काम करते है उनका पिछले 6 महीनो में बाघ ने 1 दर्जन से ज्यादा बकरियों को अपना शिकार बनाया था।रोशन लाल वन विभाग को सूचित करते रहे और जब उसके ऊपर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तब उन्होंने परेशान होकर 1100 नंबर पर कंप्लेंट दर्ज करवाई और 1100 नंबर पर शिकायत दर्ज होने के बाद वन्य विभाग की टीम हरकत में आई और लगभग 1 महीना पहले उन्होंने बाघ को रेस्क्यू करने के लिए रोशन लाल के बकरी पालन वाले स्थान के पास पिंजरा लगाया। पिंजरे में रोशन लाल को एक बकरी के बच्चे को रोजाना उसके एक किनारे पर डालना पड़ता था ताकि बाघ उसके शिकार के लालच में पिंजरे में घुस जाए और जाल में पकड़ा जाए। आखिरकार उनकी 1 महीने की लगातार मेहनत कामयाब हुई और पांच जनवरी को बाघ उस पिंजरे के जाल में फंस गया। कई बार तो रोशन लाल और हरविंदर कंवर दिन में बाग के हमले से अपने पशुधन को छुड़वा चुके थे। रोशन लाल के लगभग 1 दर्जन से ज्यादा बकरियों को तेंदुआ उठा चुका था जिसमे 8 बकरियां और 5 छोटे बकरे थे और हरविंदर कंवर के भी 8 बकरियों को तेंदुआ अपना शिकार बना चुका था। इसी तरह बाकी ग्रामीणों के भी 1,2 कर करके बहुत से बकरियों को तेंदूआ अपना शिकार बना चुका था। मौके पर रोशन लाल गांव रूवाह्न के साथ हरविंदर कंवर गांव कोंटा, ज्ञान कश्यप गांव तलोग, नरेंद्र कंवर गांव कोंटा,विनोद कुमार गांव रूवाह और रमेश कुमार गांव सलगा मौजूद थे। इस बाघ के पकड़े जानें से ग्रामीणों में बना हुआ भय का माहौल कम हुआ क्योंकि ये जानवर सिर्फ पशुधन के लिए ही नहीं बल्कि ग्रामीणों और विशेषकर स्कूली बच्चों की जान के लिए भी खतरा था।रोशन लाल ने पिंजरे में बाघ के पकड़े जाने पर वन्य विभाग की टीम का धन्यवाद किया और पंचायत में इस तरह के पिंजरे के प्रावधान की मांग की ताकि ग्रामीणों के हो रहे नुक़सान को रोका जा सके, उनका कहना था की ग्रामीण लोगों की मुख्य आजीविका का साधन खेती बाड़ी और पशुधन होता है जिसपर वो निर्भर होते हैं और उन्होंने विभाग से बाघ की वजह से पशुधन के अभी तक के नुक़सान की भरपाई के लिए गुहार भी लगाई।





