दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दाड़लाघाट में आयोजित की जा रही श्री राम कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास साध्वी राधिका भारती ने श्री राम जन्म प्रसंग का बखान किया। साध्वी भारती ने कहा की जब-जब भी इस धरा पर अत्याचार और पाप बढ़ता है तब तब अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए भगवान स्वयं धरती पर अवतार लेते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। रावण के बढ़ते अनाचार और पापाचार से पृथ्वी पर रहने वाले ऋषि मुनि और आम जनमानस अत्यंत दु:खी हो चुके थे। उन्हें इन अत्याचारों से मुक्त करने के लिए श्री हरि विष्णु अयोध्या नरेश राजा दशरथ के घर पुत्र के रूप में अवतार लेते हैं जिन्हें संपूर्ण विश्व मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र के नाम से जानता है। भगवान श्री रामचंद्र के संपूर्ण जीवन का सार मर्यादा पालन है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से प्राणी मात्र को बताया है कि यदि मानव श्रीराम के चरित्र को जीवन में धारण कर ले तो उसका कल्याण निश्चित है। उन्होंने कहा कि रावण अति विद्वान और संपूर्ण वेदों का ज्ञाता था लेकिन केवल मात्र ज्ञान होना बुद्धिमानी या विद्वता की निशानी नहीं है। ज्ञानी और विद्वान होने के साथ-साथ रावण को अपने ज्ञान और विद्वता का अभिमान भी बहुत था। यही अभियान उसके नाश का कारण बना। इसी अभिमान के चलते वह भगवान के इतने करीब होकर भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि मानव तन प्राप्त करने के साथ ही मनुष्य ईश्वर को प्राप्त करने का अधिकारी भी बन जाता है। लेकिन अज्ञानता तथा पांच प्रमुख विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के चलते वह चौरासी लाख जन्मों के बाद मिले मनुष्य जन्म में ईश्वर प्राप्ति के दुर्लभ अवसर को गंवा देता है। आज की कथा कार्यक्रम में लालचंद ठाकुर तथा नरेंद्र ठाकुर ने यजमान के रूप में परिवार सहित पूजा एवं आरती में भाग लिया।





