कुनिहार
कुनिहार स्थित पावन अनादि कालीन शिव तांडव गुफा में आयोजित शिव महापुराण कथा के आठवें दिवस का कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कथा व्यास आचार्य श्री बलवंत शांडिल्य जी ने आज के प्रवचन में भगवान शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय महाराज की उत्पत्ति तथा उन्हें देवताओं का सेनापति बनाए जाने की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।
आचार्य जी ने बताया कि जब दैत्य तारकासुर के अत्याचारों से देवता अत्यंत व्याकुल हो उठे, तब ब्रह्मा जी के वरदान के कारण उसका वध केवल शिवपुत्र द्वारा ही संभव था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव और माता पार्वती के तेज से प्रकट हुए दिव्य बालक कार्तिकेय का पालन-पोषण छह कृतिकाओं ने किया, इसी कारण उनका नाम कार्तिकेय पड़ा। आगे चलकर उनकी वीरता, तेज और दिव्य सामर्थ्य को देखकर समस्त देवताओं ने उन्हें अपना सेनापति नियुक्त किया। कथा सुनते ही पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठे।
इसके पश्चात आचार्य जी ने अत्यंत रोचक शैली में श्री गणपति महाराज के जन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन के लेप से एक दिव्य बालक की रचना की और उसे द्वारपाल बनाकर स्वयं स्नान करने चली गईं। उसी समय भगवान शिव वहाँ आए और बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। क्रोधित होकर शिवगणों के साथ हुए युद्ध में बालक का सिर कट गया। माता पार्वती के विलाप से त्रस्त होकर भगवान शिव ने गज का शीश लगाकर बालक को पुनर्जीवित किया और उसे प्रथम पूज्य गणेश का पद प्रदान किया। आचार्य जी ने समझाया कि गणपति की कथा हमें आज्ञापालन, श्रद्धा और माता-पिता के सम्मान का संदेश देती है।
पूरे प्रवचन के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसपान करते रहे। भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण पूर्णतः शिवमय बना रहा। आयोजन समिति के अनुसार कथा के आगामी दिवसों में भी इसी प्रकार धार्मिक कार्यक्रम और आरती का आयोजन किया जाएगा।



