ग्राम पंचायत सर्यान्ज के ऐतिहासिक बाड़ादेव महाराज के मंदिर बाड़ीधार में सायर संक्रांति के 8 दिन पहले वहां के मुख्या मंगलमुखी द्वारा बेल वादन से सुबह और शाम को संध्या बेला में बेल बजाई जाती है इन आठ दिन में समस्त परगना वासी अपने अपने घर से नई इसे लोकल भाषा में बरो भी कहा जाता है फसल की नवीं नेह बाड़ादेव महाराज जी को चढ़ाते है और सक्रांति के पहली रात को जागरण भी होता है और रामायण की गाथा भी कुछ लोगों द्वारा गाई जाती है जिसे लोकल भाषा में बरलाज भी कहा जाता है। पूरी बाघल में बरलाज की शुरुआत बाड़ीधार से इसी रात को शुरू होती है ।





