March 5, 2026 7:33 am

सुभाष शर्मा हिमाचली का “बाड़ादेवा रिया ज़ातरा जो‌ आसां जाई लैणा”गीत यूट्यूब पर हुआ लॉन्च

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अर्की

शुक्रवार को सुभाष शर्मा द्वारा लिखा व स्वरबद्ध भजन
“बाड़ादेवा रिया ज़ातरा जो‌ आसां जाई लैणा ” संजय अवस्थी
विधायक अर्की के कर कमलों द्वारा रिलीज़ किया गया
भजन: बाड़ादेवा रिया ज़ातरा जो‌ आसां जाई लैणा के लेखक व स्वरबद्ध खुद सुभाष शर्मा द्वारा किया गया है संगीत परमजीत पम्मी डी ओ पी साहिल वर्मा द्वारा तो
पोस्टर डिजाइन कनिष्क वर्मा द्वारा किया गया है।
जिसे इनके यूट्यूब चैनल सुभाष शर्मा हिमाचली पर आप देख व सुन सकते है


हिमाचल आजतक से विशेष बातचीत में उन्होंने अपने सफर को हमारे पास रखा जिसे हम आपके सामने पेश कर रहे है

मेरा संगीत का सफर:– संगीत में मेरी रुचि बचपन से ही रही है लेकिन मुझे मंच पर जाने से बहुत डर लगता था पहली बार अपने स्कूल के एक कार्यक्रम में मंच पर गाने का मौका मिला वहीं से मेरे संगीत के सफर की शुरूआत हुई और‌ मजे की बात ये है कि “इतनी शक्ति हमें देना दाता की तर्ज पर नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता पर आधारित वह गाना मैंने खुद ही बनाया था वहीं से मुझे लिखने का शौक भी जागृत हुआ अपने स्कूल के दौरान विभिन्न मंचों पर गाने का अवसर मिला तथा इसके अलावा नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से युवाओं के लिए कार्यक्रम होते हैं उनमें भाग लेने का मौका भी मिला जिससे मेरा मंच पर खड़े होने का डर जो था वह समाप्त हो गया और इसके लिए मेरे परिवार से मेरे चाचू एवं एक समाजसेवी श्री पदम देव शर्मा जी को इस सब का श्रेय जाता है क्योंकि उन्होंने मुझे हमेशा मंच पर लाने के लिए प्रयास किया इन्हीं से ही मुझे नशे से दूर रहने की एवं समाज सेवा की प्रेरणा मिली इसलिए उनको मैं हमेशा अपना आदर्श मानता हूं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नम्होल से 12वीं की पढ़ाई करने के बाद बिलासपुर महाविद्यालय में बी०ए०की पढ़ाई के दौरान मुझे विभिन्न मंचों पर गाने का अवसर मिला इसके साथ-साथ उस समय मेरा लिखने का शौक भी बढ़ता गया और उस समय मेरी लिखी रचनाओं को अध्यापकों ने भी बहुत सारा और विभिन्न पत्रिकाओं में भी मेरी लिखी रचनाएं प्रकाशित हुई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में एम०ए० अर्थशास्त्र की पढ़ाई के दौरान मैंने अपने संगीत की रुचि को पूरा करने के लिए सरस्वती संगीत शिक्षा केंद्र टूटू शिमला में दाखिला लिया जहां गुरुजी गोपाल शर्मा एवं बड़े गुरु जी बलदेव शर्मा जी के आशीर्वाद से मैंने इलाहाबाद संगीत अकादमी से संगीत में जूनियर डिप्लोमा प्राप्त किया लेकिन मुझे इसी दौरान शिक्षा विभाग (समग्र शिक्षा)में लिपिक के पद पर नौकरी मिली जिस कारण मुझसे मेरी संगीत की पढ़ाई वंचित हो गई और एक लंबे अंतराल के बाद मैंने अपने संगीत के शौक को पूरा करने के लिए एक जागरण मंडली “भगवती शारदा सेवा ग्रुप नम्होल” बनाया जिससे एक बार फिर से लोगों में मुझे पहचान मिलनी शुरू हुई माता सरस्वती की कृपा से मुझे फिर से पहचान मिली तथा मैंने सोशल मीडिया पर हिमाचल के पारंपरिक गीत गाने शुरू किये जिन्हें लोगों ने बहुत पसंद किया इन गीतों में हिमाचल के पारंपरिक गीत, लोक गाथाएं, संस्कार गीत, विवाह गीत( सुहाग घोड़ियां) सभी प्रकार के गीतों को मैंने गाया और यूट्यूब चैनल “सुभाष शर्मा हिमाचली” के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जिससे लोगों ने मेरा बहुत हौसला बढ़ाया। इससे मेरा हौसला बढ़ा और मैंने अपना पहला गाना जो स्टूडियो के माध्यम से रिकॉर्ड हुआ वह माता श्री नैना देवी जी की भेंट “भवना ते लगिया रौणकां” रिलीज हुआ जिसमें माता श्री नैना देवी जी के श्रृंगार एवं माता ज्वाला रानी से मिलने का भाव दर्शाया गया है इसके अलावा शिव भजन “भोले ने रचना रचाइयां” “भोले बाबा ने डमरू बजाया” “शिव लग्न” भजनों को भी लोगों ने खूब सारा उसके बाद शिमला में शिव बावड़ी में हुई तबाही को एक गीत के माध्यम से मैंने लिखा जिसे “शिमला त्रासदी” के नाम से मैंने गाया और लोगों ने उसको बेहद पसंद किया इस गीत में उस रात का जो त्रासदी की कहानी थी उसको सम्मिलित किया गया है इसके अलावा और भी गीत “कचड़े मकान” “रोम रोम में राम बसे” “महकमा ड्राइवरी” अस्से बणा रे पंछी” “तू ही दिसदी मेरी जान” “चिट्टा खा गया” अम्मा रे हत्था रियां रोटियां” विशेष आरती आदि गीत मेरे यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए। अभी 24 जून 2025 को फौजियों को समर्पित गीत “फौजिया यादां तेरियां” यूट्यूब चैनल सुभाष शर्मा हिमाचली पर रिलीज हुआ है जिसे लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। मुझे विभिन्न मेलों में एवं लाइव शो के मंचों पर भी गीत गाने के अवसर मिले हैं हिम कला संगम बिलासपुर के माध्यम से लोक संगीत समागम कार्यक्रमों में हिस्सा बनने का अवसर मिला है तथा मुझे लोक संगीत हेतु हिम कला संगम के मंच पर पुरस्कृत भी किया गया है मेरा प्रयास रहता है कि मैं हिमाचल की संस्कृति पर अपनी पहाड़ी भाषा पर ही लिखूं और अपने यहां के वातावरण यहां के रहन-सहन के अनुसार ही गीत गांऊं ताकि लोगों को विशेष तौर पर गैर हिमाचली लोगों को हमारी सुंदर संस्कृति का परिचय मिल सके। मेरे संगीत से जुड़े इस छोटे से सफर में मेरे माता-पिता मेरे परिवार एवं गुरु स्वर्गीय बलदेव शर्मा जी एवं आदरणीय गोपाल शर्मा जी इनके अलावा पद्मदेव शर्मा जी आदरणीय लेख राम कौंडल जी शोभाराम ठाकुर जी राजकमल जी परमजीत पम्मी जी जो हिमाचल की संगीत के क्षेत्र की बहुत बड़ी साल साथ हैं एवं जीत ठाकुर जीटी लाइव शिमला का विशेष योगदान, विशेष मार्गदर्शन एवं विशेष आशीर्वाद रहा है सभी दर्शकों/ पाठकों से आशा करता हूं कि आप मेरा हौसला बढ़ाते रहेंगे और मैं अपने शौक के बहाने से अपने हिमाचल के लिए अपने समाज के लिए कुछ अच्छा लिख सकूंगा और गा सकूंगा

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