February 5, 2026 8:19 am

तामरेड़ गांवों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता एवं नशा मुक्ति सत्र का आयोजन

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अर्की

गाँव तामरेड़ में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता एवं नशा मुक्ति सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. मुक्ता रस्तोगी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को गंभीर बीमारियों जैसे एचआईवी/एड्स, यौन संचारित रोग (STI), तपेदिक (टीबी), हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी तथा नशा मुक्त भारत अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।साथ हि आंखों की देखभासल कैसे की जाए उसके बारे मैं लोगो को बतया! उन्होंने ये भी बतया की 25 अगस्त 2025 से 8 सितम्बर तक नेत्र देखभाल पखवाड़ा मनाया जा रहा है!

सत्र में विशेष रूप से कुल 46 महिलाओं ने भाग लिया, जिन्होंने गंभीरता से चर्चा को सुना और अपने प्रश्न भी पूछे। इस अवसर पर काउंसलर विजय कुमार शांडिल (एचआईवी काउंसलिंग एवं टेस्टिंग सेवाएँ, सिविल अस्पताल अर्की) ने सभी विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

उन्होंने बताया कि –

  1. एचआईवी/एड्स आज भी एक बड़ी चुनौती है। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त, दूषित सुई एवं माँ से बच्चे तक यह बीमारी फैल सकती है। समय पर जांच एवं एंटी रेट्रो वायरल थेरैपी (ART) से मरीज लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
  2. यौन संचारित रोग (STI) अक्सर शर्म या संकोच की वजह से छिपाए जाते हैं। इनका समय पर इलाज न करवाने पर गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं, साथ ही यह एचआईवी संक्रमण का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
  3. तपेदिक (टीबी) के बारे में उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि यह एक संक्रामक रोग है जो खाँसी, बुखार और वजन कम होने जैसे लक्षणों से पहचान में आता है। इसका पूरा इलाज मुफ्त में उपलब्ध है। “टीबी हारेगा , देश जीतेगा” का नारा देते हुए उन्होंने लोगों से नियमित दवा सेवन करने का आह्वान किया।
  4. हेपेटाइटिस-बी एवं सी के बारे में बताया कि यह रोग मुख्य रूप से दूषित खून, असुरक्षित इंजेक्शन या असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस-सी का इलाज दवाओं से संभव है।
  5. नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत उन्होंने युवाओं और महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक किया। शराब, तंबाकू और नशीली दवाओं की लत से व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरा परिवार प्रभावित होता है। महिलाओं से अपील की गई कि वे परिवार और समाज को नशा मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएँ। शांडिल ने यह भी बताया कि सिविल अस्पताल अर्की एवं जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस, यौन रोगों की जांच और परामर्श सेवाएँ मुफ्त में उपलब्ध हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रोत्साहित किया कि वे स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों की समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाएँ।

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने बढ़-चढ़कर प्रश्न पूछे और स्वास्थ्य संबंधी भ्रांतियों को दूर किया। कई महिलाओं ने यह भी आश्वासन दिया कि वे गाँव की अन्य महिलाओं और युवाओं तक इस जानकारी को पहुँचाएँगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिलाओं को जागरूकता सामग्री, पम्पलेट और शपथ पत्र भी वितरित किए गए। सभी महिलाओं ने एकमत होकर “टीबी मुक्त भारत, एचआईवी मुक्त भारत और नशा मुक्त भारत” का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें महिलाओं को उनके सक्रिय सहयोग के लिए बधाई दी गई।
“स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है। जागरूकता और समय पर जांच ही बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा साधन है।”

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