अखिल भारतीय आह्वान पर भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) से सम्बद्ध अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट वर्कर्स यूनियन बागा ने बागा प्लांट में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने कहा कि नई श्रम संहिताएँ मजदूर-विरोधी हैं और इनका उद्देश्य देश के श्रमिक वर्ग को बंधुआ मजदूरी और शोषण की ओर धकेलना है। यूनियन नेता बलबीर चौहान ने आरोप लगाया कि श्रम संहिताओं के माध्यम से फिक्स्ड टर्म रोजगार और ठेका प्रथा को वैधता दी गई है। वहीं मालिकों द्वारा श्रम कानूनों के उल्लंघन को गैर-आपराधिक बना दिया गया है, जबकि मजदूरों की सामूहिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियाँ लगा दी गई हैं। उन्होंने कहा कि यूनियन पंजीकरण की शर्तें कड़ी कर मजदूर संगठनों को कमजोर करने की कोशिश की गई है तथा न्यूनतम वेतन से नीचे फ्लोर वेतन लागू करने का प्रावधान मजदूरों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसी क्रम में संजय पंवर ने कहा कि लगभग सौ वर्षों के संघर्ष से हासिल अधिकारों को एक झटके में समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय बिना किसी त्रिपक्षीय वार्ता और भारतीय श्रम सम्मेलन की प्रक्रिया के लिया गया, जिसे देश की 11 में से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मजदूर वर्ग पर “जनसंहारक हमला कहा है। यूनियन नेता बृजलाल कोंडल ने चेतावनी दी कि यदि श्रम संहिताओं को रद्द नहीं किया गया और निजीकरण की नीतियाँ बंद नहीं की गईं, तो आने वाले समय में मजदूर-किसान व आम जनता का संयुक्त आंदोलन देशभर में बड़े पैमाने पर उभर कर सामने आएगा।






