कुनिहार
शिव महापुराण कथा के अंतर्गत आज पंचम दिवस पर आचार्य श्री बलवंत शांडिल्य जी ने नारी की महिमा का भावपूर्ण गुणगान किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि नारी शक्ति ही सृष्टि का आधार है और हमारी भारतीय संस्कृति ने सदैव नारी को सर्वोच्च स्थान दिया है।
आचार्य जी ने जोर देते हुए कहा कि नारी को अपनी संस्कृति और संस्कारों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यदि समाज में नारी अपनी संस्कृति का पालन करते हुए आगे बढ़े, तो यह धरती स्वर्ग बन सकती है और समाज साक्षर, संस्कारित व सशक्त बन सकता है।
कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुजन आचार्य जी के प्रेरणादायक विचारों से भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्ति एवं सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।




