राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में आज प्रदेशभर से आए पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह आंदोलन ‘हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में आयोजित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी और भेदभावपूर्ण नीति अपनाने के आरोप लगाए। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अगुवाई में जुटे पेंशनरों ने कहा कि लंबे समय से एरियर और महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान लंबित है, जबकि सरकार अन्य मदों में उदारता दिखा रही है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर प्रदेश पर बढ़ते कर्ज और राजस्व घाटे का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर लोक सेवा आयोग के पदाधिकारियों की पेंशन में कई गुना वृद्धि की गई है। इसके साथ ही विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। समिति का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की सैलरी और भत्तों में वृद्धि तथा सलाहकारों की नियुक्तियों से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि पेंशनरों की देनदारियों के मामले में वित्तीय संकट का तर्क दिया जा रहा है।
समिति ने याद दिलाया कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला में आयोजित रैली के दौरान वार्ता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। पेंशनरों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




