सीमेंट उद्योग व माइनिंग प्रभावित मंच के नेतृत्व में अंबुजा अदाणी सीमेंट कंपनी की अनियंत्रित, अवैज्ञानिक और जानलेवा ब्लास्टिंग के विरोध में चल रहा धरना मंगलवार को 39वें दिन में प्रवेश कर गया। धरना स्थल पर प्रभावित परिवारों व मंच के पदाधिकारियों ने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ अपना विरोध जारी रखा। क्रमिक भूख हड़ताल भी लगातार जारी है। मंच ने 5 जनवरी को संघोई धार क्षेत्र में हुई ब्लास्टिंग की कड़े शब्दों में निंदा की। मंच का कहना है कि दोपहर करीब 1:30 बजे हुए धमाकों से आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल बन गया। धमाकों की आवाज़ शिमला तक सुनाई देने तथा बड़े-बड़े पत्थरों के गांवों के समीप और दूर तक गिरने से आम जनजीवन को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। धरना स्थल पर मौजूद प्रभावित परिवारों और मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी मामले को भटकाने, बंद कमरों में बैठकों के माध्यम से दबाने और कंपनी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मंच का आरोप है कि यह स्थिति अंबुजा अदाणी सीमेंट कंपनी के दबाव और प्रशासनिक मिलीभगत का परिणाम है। मंच के राज्य संयोजक संदीप ने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई होती, तो क्षेत्र में दिन-रात हो रही भारी ब्लास्टिंग से लोगों का जीवन इस स्तर पर खतरे में न पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र आज भी कंपनी के कथित अपराधों पर पर्दा डालने का काम कर रहा है, जो कानून के शासन और आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
धरना स्थल से मंच ने कंपनी को संरक्षण देने वाले सभी प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल इस्तीफे की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की गई कि अंबुजा अदाणी सीमेंट कंपनी के बोर्ड ऑफ मेंबर्स को बर्खास्त किया जाए, जानलेवा ब्लास्टिंग मामलों में कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, दोषी अधिकारियों को पद से हटाया जाए तथा पूरे मामले की न्यायिक जांच और राज्य स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच करवाई जाए। मंच ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और जिला प्रशासन की होगी। मंच ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के जीवन, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है, और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।





