आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश प्रवक्ता अशोक चन्देल ने सरकार को घेरते हुए कयय सवाल किए है उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश की जनता से स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया था। बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक न शहर स्मार्ट बन पाए और न ही बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो सकीं। उल्टा सरकार ने स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता को केवल स्मार्ट मीटर थमा दिए हैं।
सवाल यह है कि जब सड़कों की हालत बदहाल है, पानी और सीवरेज की व्यवस्था चरमराई हुई है, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं अधूरी हैं, तो स्मार्ट सिटी आखिर बनी कहाँ है? सरकार स्मार्ट सिटी नहीं बना पाई, लेकिन उसने स्मार्ट मीटर ज़रूर बना दिए — वो भी घर-घर जबरन थोपकर।
स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आम आदमी, किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं और अब स्मार्ट मीटर उनके लिए नई मुसीबत बनकर सामने आए हैं।
प्री-पेड स्मार्ट मीटर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा को रिचार्ज से जोड़ना पूरी तरह जनविरोधी सोच को दर्शाता है। रिचार्ज खत्म होते ही बिजली काट देना अमानवीय और असंवेदनशील कदम है।
स्मार्ट मीटरों के दुष्परिणाम साफ हैं—
1)बिना कारण बढ़ते बिजली बिल
2)तकनीकी खराबियों से गलत रीडिंग
3)उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव
गरीब परिवारों के लिए अंधेरे का खतरा
इन्हीं कारणों से जनता ने स्मार्ट मीटरों के बहिष्कार का मन बना लिया है। आम आदमी पार्टी सरकार से स्पष्ट मांग है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और पहले यह बताया जाए कि स्मार्ट सिटी आखिर बनी कहाँ है?
यदि सरकार ने जनता की आवाज़ को अनसुना किया, तो आने वाले समय में यह विरोध आंदोलन का रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और बिजली विभाग की होगी।




