March 4, 2026 9:14 am

सोलन जिला कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा में बदलावों के खिलाफ दून विधानसभा के दाड़वा पंचायत मे बैठक की और सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

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चंडी सोलन
पवन कुमार सिंघ

सोलन जिला कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत दून विधानसभा क्षेत्र के दाड़वा में एक बैठक का आयोजन किया। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए बदलावों पर चर्चा की गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मनरेगा का स्वरूप बदल दिया है, जिससे ग्रामीणों को नुकसान होगा और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। नेताओं ने सरकार से मनरेगा में बदलाव वापस लेने की मांग की। 21 जनवरी 2026 को मनरेगा बचाओ संग्राम के अंतर्गत सोलन जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा एक बैठक का आयोजन दून विधानसभा क्षेत्र के तहत पडने वाली ग्राम पंचायत दाड़वा में किया गया। इस कार्यक्रम में सोलन जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष वरमानी, दून के विधायक रामकुमार चौधरी, पर्यवेक्षक के तौर पर अवनीत लांबा, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व वरिष्ठ प्रधान अरुण शर्मा सहित अन्य लोगों ने शिरकत की और उपस्थित ग्रामीणों को केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम व उसके स्वरूप में किए गए बदलावों को लेकर विस्तार से जानकारी दी। बैठक को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष वरमानी ने बताया कि मनरेगा 20 वर्ष पहले डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने शुरू की थी ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उन्हीं के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके। मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश कि किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध करवाना अनिवार्य था, लेकिन अब मौजूदा मोदी सरकार ने इसमें बदलावों के बाद काम मांगने का अधिकार नहीं रहेगा बल्कि सरकार की मर्जी से काम दिया जाएगा। मोदी सरकार चुनेगी कि की कौन सी ग्राम पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं।
वहीं बैठक को संबोधित करते हुए दून के विधायक रामकुमार चौधरी ने कहा कि मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मजदूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी। साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था ताकि जरूरत पड़ने पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसका स्वरूप बदल दिया है और मजदूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी। जिसमें हर साल बढ़ोतरी की कोई गारंटी नहीं होगी। फसल कटाई के मौसम में यह योजना नहीं चलेगी, जिससे मजदूरों को बिना न्यूनतम मजदूरी के जो भी दूसरा काम मिले उसे स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीणों को नुकसान होगा और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में दाडवा पंचायत के प्रधान रमेश ठाकुर, दून ब्लॉक इकाई के पूर्व अध्यक्ष सोहनलाल, ग्राम पंचायत चंडी के प्रधान बलवंत ठाकुर, प्रधान बढलग महेंद्र ठाकुर, ग्राम पंचायत घड़सी इंदरजीत, ग्राम पंचायत जगजीतनगर मेहर सिंह, पूर्व ब्लाक सचिव महेंद्र, इंटक प्रदेश सचिव मुकेश वालिया, उप प्रधान दाडवा हीरालाल, वार्ड पंच चमन, वार्ड पंच रवि, अनीता सहित अन्य कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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