Month: April 2025

  • दशरथ का अंतिम संस्कार(अध्याय62)

    दशरथ का अंतिम संस्कार(अध्याय62)

    संक्षिप्त रामायण(भार्गव)

    दशरथ अंतिम संस्कार

    फिर वामदेव जी और गुरु वशिष्ठ आये हैं। उन्होंने भरत जी को अंतिम संस्कार के लिए कहा है। सब दाह क्रिया की गई और सबने विधिपूर्वक स्नान करके तिलांजलि दी। फिर वेद, स्मृति और पुराण सबका मत निश्चय करके उसके अनुसार भरतजी ने पिता का दशगात्र विधान किया॥

    एक दिन शुभ मुहर्त शोधकर गुरु वशिष्ठ जी राज सभा बुलाते हैं। सब लोग राजसभा में जाकर बैठ गए। तब मुनि ने भरतजी तथा शत्रुघ्नजी दोनों भाइयों को बुलवा भेजा। भरतजी को वशिष्ठजी ने अपने पास बैठा लिया और नीति तथा धर्म से भरे हुए वचन कहे॥ मुनिनाथ ने दुःखी होकर कहा- हे भरत! हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं॥ ऐसा विचार कर किसे दोष दिया जाए? और व्यर्थ किस पर क्रोध किया जाए?

    तुम्हारे पिताजी की आज्ञा पाकर राम वन को जा चुके हैं और उनकी ये इच्छा थी की अब तुम राज गद्दी पर बैठो। तुमको भी आज्ञा का पालन करना है। और तुम चिंता मत करो जब राम 14 वर्षों के बाद वन से लौटकर आएं तो तुम गद्दी उन्हें गद्दी दे देना।

    मंत्रियों ने भी वसिष्ठ जी की बात पर सहमति दी है। और यही कहा है की तुम अभी गद्दी पर बैठो जब राम आएंगे तब की तब देखि जाएगी।

    माँ ने भी बहुत समझाया है लेकिन भरत जी को किसी की बात अच्छी नही लगी।

    भरत जी कहते हैं आप सबने अपनी-अपनी बात कही लेकिन अब मेरा मत सुनिए-

    हित हमार सियपति सेवकाईं। सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाईं॥ मेरा कल्याण तो सीतापति श्री रामजी की सेवा में है, जिसे माता की कुटिलता ने छीन लिया।

    और आप लोग मुझे गद्दी पर बैठने के लिए कह रहे हो। मेरे भाई भाभी वन में नंगे पाँव घूम रहे हैं और आप कह रहे हो की मैं गद्दी पर बैठ जाऊं? भरत जी कहते हैं ये ठीक इस प्रकार होगा!

    ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार। तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार॥

    एक तो किसी की ग्रह दशा ठीक नही चल रही हो, ऊपर से वो पागल हो जाये और उसी को फिर बिच्छू डंक मार दे, उसको यदि मदिरा पिलाई जाए, और फिर उसे किसी वैद्द के पास लेके जाओ तो बताओ उसका उपचार किस प्रकार होगा?

    अब तो उपचार तब ही होगा जब – आपनि दारुन दीनता कहउँ सबहि सिरु नाइ। देखें बिनु रघुनाथ पद जिय कै जरनि न जाइ॥

    सबको सिर झुकाकर मैं अपनी दारुण दीनता कहता हूँ। श्री रघुनाथजी के चरणों के दर्शन किए बिना मेरे जी की जलन न जाएगी॥

    और मेरा यही मत है की हम सबको मिलकर राम जी के पास जाना चाहिए। और आप लोग ये मत सोचना की अगर तुम नही जाओगे तो मैं नही जाऊंगा। मेरा तो संकल्प हो चुका है, मैं तो अब राम के चरणों में जा रहा हूँ। भरत जी महाराज कहते हैं – यद्यपि मैं बुरा हूँ और अपराधी हूँ और मेरे ही कारण यह सब उपद्रव हुआ है, उसके बावजूद श्री रामजी मुझे शरण में सम्मुख आया हुआ देखकर सब अपराध क्षमा करके मुझ पर विशेष कृपा करेंगे॥

    जैसे ही भरत ने ये शब्द बोले हैं – सारी सभा भरत जी जय जयकार करने लगी है और कह दिया है की इस संसार में आज से पहले भरत जैसा भाई ना तो हुआ है और ना ही आगे कभी होगा। बोलिए भरत जी महाराज की जय !!

    गोस्वामी तुलसीदास जी यहाँ पर एक बड़ी सुंदर बात कह रहे हैं – जरउ सो संपति सदन सुखु सुहृद मातु पितु भाइ। सनमुख होत जो राम पद करै न सहस सहाइ॥ – वह सम्पत्ति, घर, सुख, मित्र, माता, पिता, भाई जल जाए जो श्री रामजी के चरणों के सम्मुख होने में हँसते हुए (प्रसन्नतापूर्वक) सहायता न करे॥

  • कैसा रहेगा आज आप का दिन,पढ़ें अपना सम्पूर्ण राशिफ़ल

    कैसा रहेगा आज आप का दिन,पढ़ें अपना सम्पूर्ण राशिफ़ल

    राशिफल (भार्गव)

    मेष
    21-04-2025

    ♈ मेष :

    प्रभावशाली लोगों का सहयोग आपके उत्साह को दोगुना कर देगा। आपको कई स्रोतों से आर्थिक लाभ होगा। बढ़िया दिन है जब आप सबके ध्यान को अपनी तरफ खींचेंगे। आपके सामने चुनने के लिए कई चीज़ें होंगी और आपके सामने समस्या यह होगी कि किसे पहले चुना जाए। प्यार में अपने अशिष्ट बर्ताव के लिए माफ़ी मांगें। काम पर लोगों के साथ मेलजोल में समझ और धैर्य से सावधानी बरतें। अगर आप किसी परिस्थिति से घबराकर भागेंगे तो वह आपका पीछा हर निकृष्ट तरीक़े से करेगी। कोई व्यक्ति आपके जीवनसाथी में काफ़ी दिलचस्पी दिखा सकता है, लेकिन दिन के आख़िर तक आपको एहसास होगा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 5

    भाग्यशाली रंग: हरा रंग

     

    वृष
    21-04-2025

    ♉वृषभ :

    आज का दिन आपके जीवन में ढेर सारी सौगात लेकर आया है। आज आपको कोई बड़ा राजनीत्तिक ऑफर मिल सकता है। इसे आप सहर्ष स्वीकार कर लेंगे लेकिन थोड़ा संतोष जरूर रखें। महत्वाकांक्षाओं और सपनों के पूरा होने का समय आ गया है। बिजनेस के लिए समय अच्छा है। आज अचानक धन लाभ होगा। विद्यार्थी पढ़ाई में मन न लगने के कारण कुछ परेशान हो सकते हैं। भविष्य की दृष्टि से आज निवेश करना फायदेमंद रहेगा। लोभ लालच की स्थिति से बचें।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिणपूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 9

    भाग्यशाली रंग: पीला रंग

     

    मिथुन
    21-04-2025

    ♊ मिथुन :

    आज आप के राजनैतिक क्षेत्र में असमंजस पूर्ण स्थिति बनी रहेगी। व्यवसाय में लाभ संभव है। आप थकान और तनाव महसूस करेंगे। इस बात में सावधानी बरतें कि आप किसके साथ आर्थिक लेन-देन कर रहे हैं वह आपके विश्वासपात्र है या नहीं। माता-पिता की तबियत में सुधार होगा। आज के दिन आराम करना जरूरी साबित होगा, क्योंकि आप हाल के दिनों में भारी मानसिक दबाव से गुजरे हैं। नयी गतिविधियाँ और मनोरंजन आपके लिए विश्राम करने में सहायक सिद्ध होंगे। आप अचानक ही शायद किसी ऐसे व्यक्ति से मिलें जो आपको आपके व्यावसायिक या निजी जीवन से संबंधित सलाह देगा। परिवार की जिम्मेदारी बढ़ सकती हैं।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 2

    भाग्यशाली रंग: नीला रंग

     

    कर्क
    21-04-2025

    ♋ कर्क :

    किसी पुराने दोस्त से मुलाक़ात आपका मन ख़ुश कर देगी। आप दूसरों पर कुछ ज़्यादा ख़र्चा कर सकते हैं। अगर आप अपनी घरेलू ज़िम्मेदारियों को अनदेखा करेंगे, तो कुछ ऐसे लोग नाराज़ हो सकते हैं जो आपके साथ रहते हैं। आप अपने प्रिय के रवैये के प्रति काफ़ी संवेदनशील रहेंगे अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखें और ऐसा कुछ भी करने से बचें जिसके लिए बाक़ी की ज़िन्दगी आपको पछताना पड़े। कार्यक्षेत्र में आपकी उन्नति कुछ बाधाओं के चलते अटक सकती है, बस धैर्य से काम लें। आजीविका के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन भी देखने को मिलेगा।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर

    भाग्यशाली संख्या: 1

    भाग्यशाली रंग: लाल रंग

     

    सिंह

    21-04-2025

    ♌ सिंह :

    आज आप अपने काम को और भी बेहतर बनाने में लगे रहेंगे लेकिन जब तक काम बन न जाये उसकी चर्चा किसी से न करें। किसी खास विषय पर प्लानिंग बनाएंगे। कोई पुराना काम पूरा कर सकते हैं। भाईयों से लंबी बातचीत होगी। अपना नजरिया सकारात्मक रखेंगे, तो नतीजा अच्छा रहेगा। किसी के लिए आप कोई गिफ्ट खरीद सकते हैं। बच्चों के साथ तालमेल बना रहेगा। कोर्ट कचहरी के मामलों में सावधानी रखें। आपके शत्रु गुप्त रूप से षड्यंत्र करने की कोशिश कर सकते हैं।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिण

    भाग्यशाली संख्या: 3

    भाग्यशाली रंग: पीला रंग

     

    कन्या
    21-04-2025

    ♍ कन्या :

    आज यात्रा से थकावट महसूस करोगे। अपने रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए आपने बहुत मेहनत की है और आपकी मेहनत रंग लाई है। ये दिन खूब मौज-मस्ती करने का है क्योंकि आपका मित्र भी आपके साथ है। कार्ययोजना में मामूली बदलाव कर अच्छा लाभ कमाएंगे। अपने नजरिए को दूसरों पर न थोपें। कामकाज के दौरान आप पूरे दिन काफ़ी हतोत्साहित महसूस कर सकते हैं। आज आपको मनचाहा काम मिलने से प्रसंता होगी। नई तकनीक का प्रयोग करके अच्छा लाभ कमाएंगे। भाग्य और धर्म आदि बातों पर ध्यान केन्द्रित होगा।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर

    भाग्यशाली संख्या: 8

    भाग्यशाली रंग: नीला रंग

     

    तुला
    21-04-2025

    ♎ तुला :

    दिन के कामों को सेहत बाधित कर सकती है। फ़ौरी तौर पर मज़े लेने की अपनी प्रवृत्ति पर क़ाबू रखें और मनोरंजन पर ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च करने से बचें। आज आपका ऊर्जा से भरपूर, ज़िंदादिल और गर्मजोशी से भरा व्यवहार आपके आस-पास के लोगों को ख़ुश कर देगा। आज रोमांस आपके दिलो-दिमाग़ पर छाया रहेगा। बिना गहराई से समझे-बूझे किसी व्यावसायिक/क़ानूनी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर न करें। टैक्स और बीमे से जुड़े विषयों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 7

    भाग्यशाली रंग: बैंगनी रंग

     

    वृश्चिक
    21-04-2025

    ♏ वृश्चिक :

    आज का दिन बेनिफिट और प्रोग्रेस लेकर आया है। आर्थिक रूप से फायदा मिलेगा। कहीं से ढेर सारा धन लाभ हो सकता है। आप पर कई तरह की जिम्मेदारियां भी रहेंगी, जिन्हें आप अच्छे से पूरा करेंगे। दोस्तों के साथ संबंधों में थोड़े प्रैक्टिकल रहेंगे। आज आप अपने ही मन का काम करते रहेंगे लेकिन सहयोगपूर्ण रवैया रखेंगे तो फायदे में रहेंगे। शिक्षा और राजनीति में आज आप बहुत हद तक सफल रहेंगे। आर्थिक स्थिति में वृद्धि होगी। कुंवारों का विवाह तय होने के आसार हैं।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 4

    भाग्यशाली रंग: भूरा रंग

     

    धनु
    21-04-2025

    ♑ धनु :

    आज आपको अच्छे समाचार मिल सकते हैं। आर्थिक लाभ की संभावनाएं हैं। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ आनंददायी प्रवास का योग है। आपका पारिवारिक वातावरण आनंद व उल्लास से लबालब भरा रहेगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। तन में चेतना एवं स्फूर्ति का संचार होगा। गुस्सा आना स्वाभाविक है। लेकिन शांत रहना आपके फायदे में साबित होगा। उनसे मिली भेट व सौगात पाकर आप आनंदित होंगे। क्रोध पर संयम रखिएगा। आज आप बहुत प्रसन्न मूड में रहेंगे। व्यवसाय में बाधा उपस्थित होने की संभावना है व उच्चपदाधिकारियों की अप्रसन्नता के कारण दुखी होने की संभावना भी है।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिण पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 8

    भाग्यशाली रंग: नीला रंग

     

    मकर
    21-04-2025

    ♑ मकर :

    वाहन चलाते वक़्त सावधानी बरतें, ख़ास तौर पर अगर आप रात के समय यात्रा कर रहें हों। प्राप्त हुआ धन आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं होगा। मामलों को सुलझाने की कोशिश में योजनाओं और मनोभावों में बदलाव आ सकता है। ज़िंदगी में एक नया मोड़ आ सकता है, जो प्यार और रोमांस को नयी दिशा देगा। मुमकिन है कि कामकाज के मोर्चे पर यह काफ़ी मुश्किल दिन रहे। ऐसी जानकारियों को उजागर न करें जो व्यक्तिगत और गोपनीय हों। थोड़ी-सी कोशिश करें तो यह दिन आपके वैवाहिक जीवन के सबसे विशेष दिनों में से एक हो सकता है।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 9
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    भाग्यशाली रंग: नारंगी रंग

     

    कुंभ
    21-04-2025

    ♒ कुंभ :

    आज का दिन काफी अनुकूल है। स्टूडेंट्स को कम मेहनत में भी अच्छी सफलता मिलेगी। अपने करियर को संवारने का एक नया मौका मिलेगा। इस राशि वाले डिजाइनरों को आज पदोन्नति का मौका मिल सकता है। नए क्रियेशन्स करने पर तारीफ के हकदार बनेंगे। थकान भरी दिनचर्या के बावजूद देर रात तक नींद उड़ी रहेगी। सफलता की खुशी आपको सोने नहीं देगी। बच्चे आज कोई अच्छी खबर देंगे। लवमेट के साथ रिलेशन्स मधुर होंगे।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 5

    भाग्यशाली रंग: हरा रंग

     

    मीन
    21-04-2025

    ♓ मीन :

    आज आपके दैनिक कार्यों में अनियमितता रहेगी। आपको कार्यस्थल पर और पारिवारिक जीवन में भी दिक्कतें आ सकती हैं। हालाँकि इस समय ऐसा कर पाना थोडा मुश्किल है, लेकिन मन को शांत रखें। आपके सामने कई अवसर एक साथ आयेंगे, आपको सोच समझकर उनमें से चुनना है। यश, प्रतिष्ठा में बढोत्तरी होगी। शिक्षा क्षेत्र में प्रगति होगी। आज आपके विचार स्थिर नहीं रहेंगे। सार्वजनिक जीवन में मान-सम्मान मिलेगा। आप अपना लक्ष्य निर्धारित कीजिए, उसके लिए एक ठोस योजना बनाइये, उस योजना पर काम कीजिए। कुटुम्ब परिजनों से सहयोग प्राप्त होगा।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 9

    भाग्यशाली रंग: सफ़ेद रंग

  • अर्की मुख्यालय से आंगनवाड़ी यूनियन ने भरी हुंकार, 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान

    अर्की मुख्यालय से आंगनवाड़ी यूनियन ने भरी हुंकार, 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान

    अर्की

    अर्की मुख्यालय में सीटू से संबद्ध आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन की अर्की प्रोजेक्ट कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में यूनियन की प्रोजेक्ट कमेटी के सदस्यों ने भाग लिया और सरकार की आंगनवाड़ी कर्मचारियों के प्रति उपेक्षा और मजदूर विरोधी नीतियों पर कड़ा रोष जताया।

    यूनियन ने घोषणा की कि 20 मई को देशभर की आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगी। यह हड़ताल लंबे समय से लंबित मांगों, अस्थायी नियुक्तियों, मानदेय में वृद्धि न होने और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर की जा रही है।

    बैठक में यह भी कहा गया कि सरकार मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों को नियमित केंद्रों में तब्दील नहीं कर रही, जिससे वहां काम करने वाली वर्कर्स और बच्चों – दोनों के साथ अन्याय हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि समय पर भुगतान नहीं होना, सामाजिक सुरक्षा का अभाव और लगातार बढ़ता कार्यभार कर्मचारियों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

    यूनियन ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया—एक ओर योजनाओं की सफलता का प्रचार किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में पोषण आहार में कटौती, केंद्रों की बदहाल हालत और कर्मचारियों की उपेक्षा स्पष्ट रूप से दिख रही है।

    आगामी हड़ताल को सफल बनाने के लिए यूनियन गांव-गांव प्रचार अभियान चलाएगी और जनता को इस संघर्ष की सच्चाई से अवगत कराएगी, ताकि सरकार पर जनदबाव बनाया जा सके।

    बैठक में सीटू राज्य उपाध्यक्ष जगत राम, जिला कमेटी सदस्य राकेश कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता बिमला ठाकुर ने की।

    यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की, तो यह संघर्ष और तेज़ किया जाएगा।

  • सी एंड वी अध्यापक संघ जिला सोलन के त्रैवार्षिक चुनाव सम्पन्न, जीत राम रघुवंशी अध्यक्ष व गुरदेव सिंह महासचिव निर्वाचित

    सी एंड वी अध्यापक संघ जिला सोलन के त्रैवार्षिक चुनाव सम्पन्न, जीत राम रघुवंशी अध्यक्ष व गुरदेव सिंह महासचिव निर्वाचित

     

    अर्की

    सी एंड वी अध्यापक संघ जिला सोलन के त्रैवार्षिक चुनाव लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह अर्की में संपन्न हुए। चुनाव प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश सी एंड वी अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गानंद शास्त्री व प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीप राम चंदेल की उपस्थिति में संपन्न हुई, जबकि दयाराम ठाकुर और प्रदीप कांत ने पर्यवेक्षक की भूमिका निभाई।

    चुनाव में लगभग 50 शिक्षकों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से जीत राम रघुवंशी को जिला अध्यक्ष, गुरदेव सिंह को महासचिव और परमानंद शास्त्री को कोषाध्यक्ष चुना गया।

    चुनाव के उपरांत सभी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और नवगठित कार्यकारिणी को बधाई दी। वक्ताओं ने सरकार से आग्रह किया कि पेंशन कम्युट संबंधी समिति की उस सिफारिश को अस्वीकार किया जाए, जिसमें 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर ही पूरी पेंशन देने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि यह निर्णय शिक्षकों के हित में नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही, चुनावी वादे के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह लागू करने की मांग दोहराई गई।

    इस अवसर पर महिला विंग की जिला अध्यक्ष अनिता कुमारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, हरिओम संख्यान, कार्यालय सह-सचिव डॉक्टर गगनदीप व प्रेस सचिव नागेश कुमार सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

  • श्री राम को केवल माने ही नहीं जाने भी–स्वामी धीरानंद  शिष्य के कल्याण का एक ही उपाय गुरु सेवा–महात्मा अवमिंदर

    श्री राम को केवल माने ही नहीं जाने भी–स्वामी धीरानंद शिष्य के कल्याण का एक ही उपाय गुरु सेवा–महात्मा अवमिंदर

    शिमला
    दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा श्री राम मन्दिर,शिमला में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया।सत्संग के शुभारम्भ में साध्वी मीनू भारती और साध्वी गार्गी भारती जी ने एक प्रार्थना का गायन किया।सत्संग विचारों में महात्मा अवमिंदर ने गुरु सेवा की महिमा वर्णन करते हुए कह कि गुरु को प्रसन्न करने का एक माध्यम है गुरु सेवा।गुरु के दिव्य मिशन में शिष्य को तन,मन,धन हर प्रकार से सहयोग करना चाहिए।साध्वी मीनू भारती जी ने “हमारे साथ हैं गुरुदेव हमें किस बात की चिन्ता” भजन का गायन कर सभी श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी धीरानन्द जी ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 3 मई से 9 मई तक श्री राम कथा का भव्य आयोजन जंजघर,नज़दीक लक्ष्मी नारायण मन्दिर,संजौली में होने जा रहा है।कथा का समय दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक रहेगा। स्वामी जी ने कहा कि प्रभु श्री राम के आदर्शों को जीवन में धारण करने से ही मानव में बदलाव आ सकता है। इसलिए हम केवल श्री राम को माने नहीं ,बल्कि श्री राम को जानें भी। आज हमें प्रभु की कथा से जुड़ने की आवश्यकता है जिससे मानव का बिखरा हुआ मन प्रभु में लग सके,क्योंकि व्यक्ति का मन ही उसके सुख और दु:ख का कारण है। यदि मानव के मन की दशा ठीक है तो उसके जीवन की दिशा भी ठीक रह सकती है।
    साध्वी गार्गी भारती जी ने बताया कि 3 मई को सुबह 10 बजे दक्षिणेश्वरी मां काली मन्दिर ढली से विशाल मंगल कलश यात्रा निकाली जायेगी जो जंजघर (कथा स्थल) पर विश्राम लेगी। साध्वी गार्गी भारती जी ने नारी शक्ति को कलश यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आहवान किया।

  • भरत कैकई व माता कौशल्या सम्वाद(अध्याय61)

    भरत कैकई व माता कौशल्या सम्वाद(अध्याय61)

    संक्षिप्त रामायण(भार्गव)

    जब भरत आये हैं तो सबसे पहले ककई के महल में गए हैं। जबकि मर्यादा तो ये कहती हैं की पहले माँ कौसल्या के पास जाना चाहिए। इसका कारण है -क्योंकि राम हमेशा केकई के महल में रहते थे क्योंकि ककई से बहुत प्रेम था और जब राम ककई के महल में हैं तो राजा दशरथ भी वहीँ रहते थे।

    फिर तीनों माताएं भी वहीं रहती थी। और जब सब यहीं है तो लक्ष्मण भी यहीं रहते थे। आज भरत ने सोचा की मैं माता के महल में जाता हूँ तो मुझे सब वहीँ मिल जायेंगे। ये सोचकर केकई के महल में आये हैं।

    ककई को महाराज के जाने का दुःख नही है बल्कि पुत्र के आने की ख़ुशी हो रही है। आरती की थाली लेकर खड़ी हैं। जैसे ही भरत ने माता का वेश देखा है तो मानो झकजोर दिया है भरत को। समझ गए है अब पिताजी स्वर्ग सिधार गए हैं।

    कहु कहँ तात कहाँ सब माता। कहँ सिय राम लखन प्रिय भ्राता॥

    भरतजी ने कहा- कहो, पिताजी कहाँ हैं? मेरी सब माताएँ कहाँ हैं? सीताजी और मेरे प्यारे भाई राम-लक्ष्मण कहाँ हैं?

    ककई कहती है- बेटा, इनमे से तुम्हे कोई नही दिखेगा। मैंने बिगड़ती बात बना ली थी। बेचारी मंथरा सहायक हुई। पर विधाता ने बीच में जरा सा काम बिगाड़ दिया। वह यह कि राजा देवलोक को पधार गए।

    भरत यह सुनते ही विषाद के मारे बेहाल हो गए। और जमीं पर तात! तात! करते हुए गिर पड़े। अपने आप को धिक्कारते हैं की अंतिम समय में पिताजी में आपकी सेवा नही कर पाया। मैं आपको स्वर्ग के लिए चलते समय देख भी न सका। फिर धीरज धरकर बोलते हैं – माता! पिता के मरने का कारण तो बताओ?

    कुटिल और कठोर कैकेयी ने अपनी सब करनी शुरू से आखिर तक खुश होकर सुना दी।

    श्री रामचन्द्रजी का वन जाना सुनकर भरतजी को पिता का मरण भूल गया और हृदय में इस सारे अनर्थ का कारण अपने को ही जानकर वे मौन होकर ज़िंदा लाश की तरह हो गए। भरत सोच रहे हैं की ये सब मेरे कारण हुआ है।

    पुत्र को व्याकुल देखकर कैकेयी समझाने लगी। मानो जले पर नमक लगा रही हो। ककई कहती है भरत तुम चिंता छोड़ दो और राज्य भोगो।

    उन्होंने धीरज धरकर बड़ी लम्बी साँस लेते हुए कहा- पापिनी! तूने सभी तरह से कुल का नाश कर दिया। यदि तेरी ऐसी ही अत्यन्त बुरी इच्छा थी, तो तूने जन्म देते ही मुझे मार क्यों नहीं डाला? तूने पेड़ को काटकर पत्ते को सींचा है और मछली के जीने के लिए पानी को उलीच डाला! मुझे इनता अच्छा सूर्य वंश मिला, दशरथ जैसे पिताजी और राम लक्ष्मण जैसे भाई मिले लेकिन मेरा दुर्भाग्य तो देख मुझे तेरे जैसी माँ मिली।

    जब तेरे ह्रदय में बुरा विचार आया तो तेरे ह्रदय के टुकड़े-टुकड़े क्यों नही हो गए? वरदान माँगते समय तेरे मन में कुछ भी पीड़ा नहीं हुई? तेरी जीभ गल नहीं गई? तेरे मुँह में कीड़े नहीं पड़ गए? राजा ने तेरा विश्वास कैसे कर लिया? तू कौन है? मुझे सच-सच कह! तू जो है, सो है, अब मुँह में स्याही पोतकर उठकर मेरी आँखों की ओट में जा बैठ॥

    भरत जी महाराज ने यहाँ तक कह दिया। तूने जग में ऐसा काम कर दिया है की आज के बाद कोई भी पिता अपनी बेटी का नाम ककई नही रखेगा। विधाता ने मुझे श्री रामजी से विरोध करने वाले तेरे हृदय से उत्पन्न किया। मेरे बराबर पापी दूसरा कौन है? मैं व्यर्थ ही तुझे कुछ कहता हूँ।

    माता की कुटिलता सुनकर शत्रुघ्नजी के सब अंग क्रोध से जल रहे हैं, पर कुछ वश नहीं चलता। उसी समय वो कुबरी वहाँ आई। उसे देखकर लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्नजी क्रोध में भर गए। मानो जलती हुई आग को घी की आहुति मिल गई हो। उन्होंने जोर से तककर कूबड़ पर एक लात जमा दी। वह चिल्लाती हुई मुँह के बल जमीन पर गिर पड़ी। उसका कूबड़ टूट गया, कपाल फूट गया, दाँत टूट गए और मुँह से खून बहने लगा।

    वह कराहती हुई बोली-हाय दैव! मैंने क्या बिगाड़ा? जो भला करते बुरा फल पाया।

    उसकी यह बात सुनकर शत्रुघ्नजी उसे पकड़-पकड़कर घसीटने लगे। तब दयानिधि भरतजी ने उसको छुड़ा दिया और दोनों भाई कौसल्याजी के पास गए॥

    कौसल्या भरत संवाद

    अब भरत जी माता कौसल्या के पास गए हैं- भरत को देखते ही माता कौसल्याजी उठ दौड़ीं। पर चक्कर आ जाने से मूर्च्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ीं। यह देखते ही भरतजी बड़े व्याकुल हो गए और शरीर की सुध भुलाकर चरणों में गिर पड़े॥

    जब माँ को होश आया है तो माता ने भरतजी को गोद में बैठा लिया और उनके आँसू पोंछकर कोमल वचन बोलीं- है भरत! तुम धीरज रखो। किसी को दोष मत दो। तेरे रघुनन्दन वन में तो गए हैं पर दुखी होकर नही गए प्रसन्न होकर गए हैं। तू बिलकुल चिंता मत कर भरत। और तेरे पिताजी को जाना ही था।

    एक दिन शरीर तो जाता ही है। और उनका तो जीवन-मरण सफल हो गया। क्योंकि वो जिए तो राम के लिए और मरे भी तो राम के लिए। भरत, शत्रुघ्न दोनों भाई विकल होकर विलाप करने लगे। तब कौसल्याजी ने उनको हृदय से लगा लिया। अनेकों प्रकार से भरतजी को समझाया। और रोते-रोते सारी रात बीत गई।

    आप सब सोच रहे होंगे इतना सब हो गया पर भरत जी कहाँ थे अब तक? मन में शंका होती है? और एक दो दिन के लिए नही 12 साल हो गए हैं।

    मिथिला में जिस समय भगवान का और तीनों कुमारों का विवाह हो चुका था। वैदिक रीति के बाद लोक रीति होती है। मिथिला की माताएं और बहनें लोक रीति कर रही थी। आपस में बातें कर रही थी और भरत जी सुन रहे थे।

    तो एक बोलती है की देखो, – अब थोड़े दिन बाद हमारी सीता-राम के साथ गद्दी पर बैठेगी। तभी एक दूसरी बोली की वाह जी वाह! ऐसा क्यों होगा?

    तब पहले वाली बोली की बड़े तो राम है इसलिए राम ही गद्दी पर बैठेंगे। और हमारी सीता वामांग में बैठेगी।

    तो दूसरी बोली की तुमको मालूम नही क्या , जब ककई का विवाह महाराज दशरथ के साथ हुआ था तो ककई के पिता ने महाराज दशरथ से वचन लिया था की जो ककई का बेटा होगा वो ही गद्दी पर बैठेगा तभी मैं अपनी बेटी का विवाह तुम्हारे साथ करूँगा।

    इसलिए तू अपनी सोच अपने पास रख , मुझे तो लगता है भरत गद्दी पर बैठेंगे और साथ में मांडवी बैठेगी।

    जैसे ही भरत ने सुना तो सोचने लगे की ये क्या हो रहा है भैया राम के रहते भरत गद्दी पर बैठेगा? इतना बड़ा अनर्थ। राम राज्य में उनके शासन में सबसे बड़ी बाधा मैं बनूँगा?

    जब विवाह करके आये तो ककई के पिता की तबियत खराब हुई थी। ककई के भाई ने खबर भिजवाई थी की कोई मिलने, देखने के लिए आये। ककई तो खुद जाना चाहती थी पर भरत ने कहा की माँ! आप मुझे जाने दो। मैं जाऊँगा। और भरत जी महाराज गए थे और 12 साल से वहीं रह रहे थे।

    साथ में ये संकल्प ले लिया था जब राम गद्दी पर बैठेंगे तो ही मैं लौटकर आऊंगा। क्योंकि अगर मैं यहाँ अयोध्या में रहा तो बाधा खड़ी हो जाएगी रघुनन्दन के लिए। इसलिए भरत जी ननिहाल में रह रहे थे।

  • कैसा रहेगा आज आप का दिन,पढ़ें अपना सम्पूर्ण राशिफ़ल

    राशिफ़ल (भार्गव)

    मेष
    20-04-2025

    ♈ मेष :

    अपने दफ़्तर से जल्दी निकलने की कोशिश करें और वे काम करें जिन्हें आप वाक़ई पसंद करते हैं। नए क़रार फ़ायदेमंद दिख सकते हैं, लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक़ लाभ नहीं पहुंचाएंगे। निवेश करते समय जल्दबाज़ी में निर्णय न लें। घर से जुड़ी योजनाओं पर विचार करने की ज़रूरत है। प्रेम-जीवन में आशा की नयी किरण आयेगी। काम पर लोगों के साथ मेलजोल में समझ और धैर्य से सावधानी बरतें। अगर आप किसी विवाद में उलझ जाएं तो तल्ख़ टिप्पणी करने से बचें।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 4

    भाग्यशाली रंग: बैंगनी रंग

    वृष
    20-04-2025

    ♉वृषभ :

    आज आप अपने काम से संबंधित किसी यात्रा पर जा सकते हैं। लेकिन ये भी हो सकता है कि आप ये यात्रा अपने दोस्तों के साथ ही करें। दिन चढ़ने पर वित्तीय तौर पर सुधार आएगा। दफ़्तर के कामकाज में ज़्यादा व्यस्तता के चलते अपने जीवनसाथी के साथ आपका रिश्ता तनावपूर्ण हो सकता है। आपका प्रिय आज रोमांटिक मूड में होगा। कुछ भी हो आपकी ये यात्रा सफल रहेगी। आज के दिन आप बिना झंझट विश्राम कर सकेंगे। आपकी योग्यता, रचनात्मकता और प्रतिभा के कारण आपको आपके प्रयासों के लिये जल्द ही पुरस्कृत किया जायेगा।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर

    भाग्यशाली संख्या: 2

    भाग्यशाली रंग: सफ़ेद रंग

    मिथुन
    20-04-2025

    ♊ मिथुन :

    आज आर्थिक स्थिति में मजबूत आएगी साथ ही तरक्की के नये मार्ग खुलेंगे। आज खुद की परेशानी पैरेन्ट्स से शेयर करेंगे तो निश्चित ही आपको उसका हल मिल जायेगा। जिससे उनका मन काफी खुश होगा। इस राशि के जमींदार को फायदा होने वाला है। इस राशि के जो स्टूडेंट्स आज विदेश में शिक्षा संबंधी लोन लेना चाहते है तो ले सकते है क्योकि समय अच्छा है। करियर की नई शुरुआत होगी। भगवान को 5 बादाम का भोग लगाएं, आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 1

    भाग्यशाली रंग: नारंगी रंग

    कर्क
    20-04-2025

    ♋ कर्क :

    मौज-मस्ती और मनपसंद काम करने का दिन है। आप घूमने-फिरने और पैसे ख़र्च करने के मूड में होंगे- लेकिन अगर आपने ऐसा किया तो बाद में आपको पछताना पड़ सकता है। शाम के समय अपने जीवनसाथी के साथ बाहर खाना या फ़िल्म देखना आपको सुकून देगा और ख़ुशमिज़ाज बनाए रखेगा। प्यार बहार की तरह है; फूलों, रोशनी और तितलियों से भरा हुआ। आज आपका रोमानी पहलू उभरकर आएगा। अपनी पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाकर आप करिअर में नए दरवाज़े खोल सकते हैं। अपने क्षेत्रे में आपको अपार सफलता मिलने की संभावना भी है।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिण

    भाग्यशाली संख्या: 5

    भाग्यशाली रंग: लाल रंग

    सिंह
    20-04-2025

    ♌ सिंह :

    आज सोच-समझकर कदम बढ़ाने की जरूरत है। जीवनसाथी के साथ यह दिन और दिनों की अपेक्षा बेहतर गुजरेगा। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप से बचें। पुराने मित्रों, रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। निवेश-नौकरी मनोनुकूल रहेंगे। बाहर जाने का कार्यक्रम बनाएं तो बेहतर रहेगा। गलतफहमियां दूर होंगी। आत्मविश्वास से तथा धैर्यपूर्वक आगे बढ़ें, सफलता अवश्य ही मिलेगी। आज आपको अपनी जिम्मेदारियों को लेकर परेशानी हो सकती है। आज आप खुद को कुछ मनोरंजक गतिविधियों में शामिल करना चाहते हैं लेकिन आपको काम की जिम्मेदारियां रोक रही हैं, आप को दोनों चीजों में संतुलन बनाने की जरूरत है।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 7

    भाग्यशाली रंग: पीला रंग

    कन्या
    20-04-2025

    ♍ कन्या :

    आज आपकी किस्मत आपका साथ देगी। जिस अच्छे मौके का आप कई दिन से इंतजार कर रहे थे आज वो मौका आपको मिलेगा। साथ ही आपको उस कार्य में सफलता भी मिलेगी। इस राशि के बिल्डर्स को आज अचानक काफी फायदा हो सकता है साथ ही धनलाभ के नये सोर्स नजर आएंगे। लवमेट आज साथ में टाइम स्पेंड करेंगे। जिससे रिश्ते मजबूत होंगे। आज जरूरतमंदो को भोजन कराएं, जीवन में सभी खुशियां मिलेंगी।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 9

    भाग्यशाली रंग: गहरा लाल

    तुला
    20-04-2025

    ♎ तुला :

    आपको सेहत से जुड़ी परेशानियों के चलते अस्पताल जाना पड़ सकता है, अतः सावधानी अपेक्षित है। भागीदारी वाले व्यवसायों और चालाकी भरी आर्थिक योजनाओं में निवेश न करें। किसी पारिवारिक भेद का खुलना आपको चकित कर सकता है। आज आपका प्रिय आपके साथ में समय बिताने और तोहफ़े की उम्मीद कर सकता है। सहकर्मी आपको काफ़ी सहयोग देंगे और कार्यक्षेत्र में विश्वास की नींव पर नए रिश्तों की शुरुआत होगी। अपनी आगे की जिंदगी के लिये मजबूत नींव रखने का यह उचित समय हैं।

    भाग्यशाली दिशा: पूर्व

    भाग्यशाली संख्या: 6

    भाग्यशाली रंग: सफ़ेद रंग

    वृश्चिक
    20-04-2025

    ♏ वृश्चिक :

    आज आपको एक अप्रत्याशित स्रोत से धन लाभ होने की संभावना है। मानसिक शांति के लिए आपकी खाली बैठने की आदत खतरनाक साबित हो सकती है। खर्चों में इजाफा होगा, लेकिन साथ ही आमदनी में हुई बढ़ोत्तरी इसको संतुलित कर देगी। अपनी रचनाधर्मिता को नया आयाम देने के लिए अच्छा दिन है। दूसरों के मामलों में दखल देने से आज बचें। आज दोपहर से कार्य में प्रगति होगी। धन का लाभ मिलेगा। पूर्व में किया हुआ प्रयास सार्थक होगा। मनोबल में वृद्धि होगी। वाद-विवाद करने से बचें। किसी छोटी सी बात पर भी आप उदास हो जायेंगे या पुराने बेहतर समय को याद करने लगेंगे।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिण

    भाग्यशाली संख्या: 8

    भाग्यशाली रंग: हरा

    धनु
    20-04-2025

    ♑ धनु :

    आज आप ऑफिस में कई अहम फैसला लें सकते हैं। किसी सीनियर की मदद से आपको धनलाभ की प्राप्ति होगी। इस राशि के साइंस के स्टूडेंट्स आज प्रैक्टिक क्लास जरूर करें। इस राशि के विवाहित आज कहीं घूमने का प्लान बना रहे है, मौसम में बदलाव का ख्याल रखें। आज जॉब संबंधी खुशखबरी मिलने से परिवार के सभी सदस्य खुश रहेंगे। शाम को घर में पार्टी का प्लान भी बना सकते है। मां दुर्गा को पंचमेवा का भोग लगाने से आपके रिश्तों में मिठास बढ़ेगी।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर

    भाग्यशाली संख्या: 2

    भाग्यशाली रंग: हरा रंग

    मकर
    20-04-2025

    ♑ मकर :

    हर तरह का निवेश करते वक़्त पूरी सावधानी बरतें। सामाजिक गतिविधियाँ मज़ेदार रहेंगी, लेकिन अपने रहस्य किसी के सामने उजागर न करें। रोमांस के लिए बढ़ाए गए क़दम असर नहीं दिखाएंगे। योजनाओं को अमली जामा पहनाने और नयी परियोजनाओं को शुरू करने के लिए अच्छा दिन है। अगर आप ख़रीदारी पर जाएँ तो ज़रूरत से ज़्यादा जेब ढीली करने से बचें। जीवनसाथी का बिगड़ता स्वास्थ्य आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

    भाग्यशाली दिशा: दक्षिण पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 8

    भाग्यशाली रंग: नीला रंग

    कुंभ
    20-04-2025

    ♒ कुंभ :

    आज आप भविष्य को देखते हुए कुछ ऐसे काम करें जिससे आपको समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। वैसे तो, ऐसा समय अभी नजदीक नहीं है फिर भी थोड़ा-थोड़ा करने से आगे चलकर सुरक्षा निश्चित होगी। किसी परिचित से मिलने के लिए यात्रा पर जा सकते हैं। आज के दिन आपकी मानसिक स्थिति दुविधापूर्ण रहेगी। जिससे महत्वपूर्ण निर्णय न लेने की सलाह है। नए कार्य का प्रारंभ न करें। कर्ज से छुटकारा मिलने की संभावनाएं हैं और नौकरी में प्रमोशन भी मिल सकता है। निवेश करने से पहले सोच समझ ले नहीं तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    भाग्यशाली दिशा: उत्तर

    भाग्यशाली संख्या: 6

    भाग्यशाली रंग: चंदन सफेद

    मीन
    20-04-2025

    ♓ मीन :

    आज आपका ध्यान आध्यात्म की तरफ रहेगा। किसी धार्मिक आयोजन में जा सकते है। जहाँ आपके मन को शंति मिलेगी। आज आपकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से होगी जो आपके बिजनेस प्रोजेक्ट में निवेश कर सकता है। आज प्रॉपर्टी की संपत्ति के मामले में बड़े फैसले हो सकते हैं अवश्य सफलता मिलेगी। लवमेट आज अपने पार्टनर को ड्रेस गिफ्ट करेगा। इससे रिश्ते की दूरियां नजदिकियों में बदल जाएगी। विष्णु भगवान की पूजा करें, आपके बिजनेस को धनलाभ होगा। अपनी सभी क्षमताओं को निखारकर औरों से बेहतर बनने की कोशिश करें।

    भाग्यशाली दिशा: पश्चिम

    भाग्यशाली संख्या: 4

    भाग्यशाली रंग: ग्रे रंग

  • भरत का कैकयी ओर माता कौशल्या से संवाद(अध्याय 61)

    भरत का कैकयी ओर माता कौशल्या से संवाद(अध्याय 61)

    संक्षिप्त रामायण(भार्गव)

    भरत ककई संवाद

    जब भरत आये हैं तो सबसे पहले ककई के महल में गए हैं। जबकि मर्यादा तो ये कहती हैं की पहले माँ कौसल्या के पास जाना चाहिए। इसका कारण है -क्योंकि राम हमेशा केकई के महल में रहते थे क्योंकि ककई से बहुत प्रेम था और जब राम ककई के महल में हैं तो राजा दशरथ भी वहीँ रहते थे।

    फिर तीनों माताएं भी वहीं रहती थी। और जब सब यहीं है तो लक्ष्मण भी यहीं रहते थे। आज भरत ने सोचा की मैं माता के महल में जाता हूँ तो मुझे सब वहीँ मिल जायेंगे। ये सोचकर केकई के महल में आये हैं।

    ककई को महाराज के जाने का दुःख नही है बल्कि पुत्र के आने की ख़ुशी हो रही है। आरती की थाली लेकर खड़ी हैं। जैसे ही भरत ने माता का वेश देखा है तो मानो झकजोर दिया है भरत को। समझ गए है अब पिताजी स्वर्ग सिधार गए हैं।

    कहु कहँ तात कहाँ सब माता। कहँ सिय राम लखन प्रिय भ्राता॥

    भरतजी ने कहा- कहो, पिताजी कहाँ हैं? मेरी सब माताएँ कहाँ हैं? सीताजी और मेरे प्यारे भाई राम-लक्ष्मण कहाँ हैं?

    ककई कहती है- बेटा, इनमे से तुम्हे कोई नही दिखेगा। मैंने बिगड़ती बात बना ली थी। बेचारी मंथरा सहायक हुई। पर विधाता ने बीच में जरा सा काम बिगाड़ दिया। वह यह कि राजा देवलोक को पधार गए।

    भरत यह सुनते ही विषाद के मारे बेहाल हो गए। और जमीं पर तात! तात! करते हुए गिर पड़े। अपने आप को धिक्कारते हैं की अंतिम समय में पिताजी में आपकी सेवा नही कर पाया। मैं आपको स्वर्ग के लिए चलते समय देख भी न सका। फिर धीरज धरकर बोलते हैं – माता! पिता के मरने का कारण तो बताओ?

    कुटिल और कठोर कैकेयी ने अपनी सब करनी शुरू से आखिर तक खुश होकर सुना दी।

    श्री रामचन्द्रजी का वन जाना सुनकर भरतजी को पिता का मरण भूल गया और हृदय में इस सारे अनर्थ का कारण अपने को ही जानकर वे मौन होकर ज़िंदा लाश की तरह हो गए। भरत सोच रहे हैं की ये सब मेरे कारण हुआ है।

    पुत्र को व्याकुल देखकर कैकेयी समझाने लगी। मानो जले पर नमक लगा रही हो। ककई कहती है भरत तुम चिंता छोड़ दो और राज्य भोगो।

    उन्होंने धीरज धरकर बड़ी लम्बी साँस लेते हुए कहा- पापिनी! तूने सभी तरह से कुल का नाश कर दिया। यदि तेरी ऐसी ही अत्यन्त बुरी इच्छा थी, तो तूने जन्म देते ही मुझे मार क्यों नहीं डाला? तूने पेड़ को काटकर पत्ते को सींचा है और मछली के जीने के लिए पानी को उलीच डाला! मुझे इनता अच्छा सूर्य वंश मिला, दशरथ जैसे पिताजी और राम लक्ष्मण जैसे भाई मिले लेकिन मेरा दुर्भाग्य तो देख मुझे तेरे जैसी माँ मिली।

    जब तेरे ह्रदय में बुरा विचार आया तो तेरे ह्रदय के टुकड़े-टुकड़े क्यों नही हो गए? वरदान माँगते समय तेरे मन में कुछ भी पीड़ा नहीं हुई? तेरी जीभ गल नहीं गई? तेरे मुँह में कीड़े नहीं पड़ गए? राजा ने तेरा विश्वास कैसे कर लिया? तू कौन है? मुझे सच-सच कह! तू जो है, सो है, अब मुँह में स्याही पोतकर उठकर मेरी आँखों की ओट में जा बैठ॥

    भरत जी महाराज ने यहाँ तक कह दिया। तूने जग में ऐसा काम कर दिया है की आज के बाद कोई भी पिता अपनी बेटी का नाम ककई नही रखेगा। विधाता ने मुझे श्री रामजी से विरोध करने वाले तेरे हृदय से उत्पन्न किया। मेरे बराबर पापी दूसरा कौन है? मैं व्यर्थ ही तुझे कुछ कहता हूँ।

    माता की कुटिलता सुनकर शत्रुघ्नजी के सब अंग क्रोध से जल रहे हैं, पर कुछ वश नहीं चलता। उसी समय वो कुबरी वहाँ आई। उसे देखकर लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्नजी क्रोध में भर गए। मानो जलती हुई आग को घी की आहुति मिल गई हो। उन्होंने जोर से तककर कूबड़ पर एक लात जमा दी। वह चिल्लाती हुई मुँह के बल जमीन पर गिर पड़ी। उसका कूबड़ टूट गया, कपाल फूट गया, दाँत टूट गए और मुँह से खून बहने लगा।

    वह कराहती हुई बोली-हाय दैव! मैंने क्या बिगाड़ा? जो भला करते बुरा फल पाया।

    उसकी यह बात सुनकर शत्रुघ्नजी उसे पकड़-पकड़कर घसीटने लगे। तब दयानिधि भरतजी ने उसको छुड़ा दिया और दोनों भाई कौसल्याजी के पास गए॥

    कौसल्या भरत संवाद

    अब भरत जी माता कौसल्या के पास गए हैं- भरत को देखते ही माता कौसल्याजी उठ दौड़ीं। पर चक्कर आ जाने से मूर्च्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ीं। यह देखते ही भरतजी बड़े व्याकुल हो गए और शरीर की सुध भुलाकर चरणों में गिर पड़े॥

    जब माँ को होश आया है तो माता ने भरतजी को गोद में बैठा लिया और उनके आँसू पोंछकर कोमल वचन बोलीं- है भरत! तुम धीरज रखो। किसी को दोष मत दो। तेरे रघुनन्दन वन में तो गए हैं पर दुखी होकर नही गए प्रसन्न होकर गए हैं। तू बिलकुल चिंता मत कर भरत। और तेरे पिताजी को जाना ही था।

    एक दिन शरीर तो जाता ही है। और उनका तो जीवन-मरण सफल हो गया। क्योंकि वो जिए तो राम के लिए और मरे भी तो राम के लिए। भरत, शत्रुघ्न दोनों भाई विकल होकर विलाप करने लगे। तब कौसल्याजी ने उनको हृदय से लगा लिया। अनेकों प्रकार से भरतजी को समझाया। और रोते-रोते सारी रात बीत गई।

    आप सब सोच रहे होंगे इतना सब हो गया पर भरत जी कहाँ थे अब तक? मन में शंका होती है? और एक दो दिन के लिए नही 12 साल हो गए हैं।

    मिथिला में जिस समय भगवान का और तीनों कुमारों का विवाह हो चुका था। वैदिक रीति के बाद लोक रीति होती है। मिथिला की माताएं और बहनें लोक रीति कर रही थी। आपस में बातें कर रही थी और भरत जी सुन रहे थे।

    तो एक बोलती है की देखो, – अब थोड़े दिन बाद हमारी सीता-राम के साथ गद्दी पर बैठेगी। तभी एक दूसरी बोली की वाह जी वाह! ऐसा क्यों होगा?

    तब पहले वाली बोली की बड़े तो राम है इसलिए राम ही गद्दी पर बैठेंगे। और हमारी सीता वामांग में बैठेगी।

    तो दूसरी बोली की तुमको मालूम नही क्या , जब ककई का विवाह महाराज दशरथ के साथ हुआ था तो ककई के पिता ने महाराज दशरथ से वचन लिया था की जो ककई का बेटा होगा वो ही गद्दी पर बैठेगा तभी मैं अपनी बेटी का विवाह तुम्हारे साथ करूँगा।

    इसलिए तू अपनी सोच अपने पास रख , मुझे तो लगता है भरत गद्दी पर बैठेंगे और साथ में मांडवी बैठेगी।

    जैसे ही भरत ने सुना तो सोचने लगे की ये क्या हो रहा है भैया राम के रहते भरत गद्दी पर बैठेगा? इतना बड़ा अनर्थ। राम राज्य में उनके शासन में सबसे बड़ी बाधा मैं बनूँगा?

    जब विवाह करके आये तो ककई के पिता की तबियत खराब हुई थी। ककई के भाई ने खबर भिजवाई थी की कोई मिलने, देखने के लिए आये। ककई तो खुद जाना चाहती थी पर भरत ने कहा की माँ! आप मुझे जाने दो। मैं जाऊँगा। और भरत जी महाराज गए थे और 12 साल से वहीं रह रहे थे।

    साथ में ये संकल्प ले लिया था जब राम गद्दी पर बैठेंगे तो ही मैं लौटकर आऊंगा। क्योंकि अगर मैं यहाँ अयोध्या में रहा तो बाधा खड़ी हो जाएगी रघुनन्दन के लिए। इसलिए भरत जी ननिहाल में रह रहे थे।

  • कुनिहार वन विभाग के अधिकारीयों ने किया लोगों को जागरूक ।

    कुनिहार वन विभाग के अधिकारीयों ने किया लोगों को जागरूक ।

    कुनिहार
    कुनिहार क्षेत्र के हाटकोट के खलयाणी मैं पिछले कई दिनों से तेंदुए के आतक से खलयाणी के लोग सहमे हुए हैं पिछले पाँच छ दिनों से प्रतिदिन तेंदुआ घरों के आस पास रात को 12 बजे के बाद कई लोगों ने देखा जिस की खबर भी अख़बार मै प्रकाशित हुई थी जिस पर बन विभाग के अधिकारी रेंज आफ़िसर राजेन्द्र सिंह ब्लांक आफ़िसर नरायण दत शर्मा और बन रक्षक सजीव कुमार और रीता दास ने खलयाणी क्षेत्र मै रात के वक्त दौरा किया और लोगों को तेंदुए के सन्दर्भ मै समझाया और उससे बचाव के बारे में बतलाया और लोगों को कहा के कोई भी व्यक्ति अकेला ओर कुते को घुमाने के लिए री और नौटू की तरफ़ न जाये और घर के बाहर की लाइट जला कर रखे और तेंदुए फिर नज़र आये तो कृपया तुरंत बन विभाग कुनिहार सुचित करे ।
    रेज अधिकारी ने सत प्रकाश जोशी,आर पी जोशी ,शिप्रा जोशी ,संदीप कवर से मिले और उनसे तेंदुए के बारे जानकारी ली और राह चलते लोगों को भी समझाया के रात अकेले न चलें और Torch और लाठी लेकर चले . बिलकुल सतर्क रहे ताकि कोई घटना घटित न हो सके।

  • किश्तों का एरियर भी शीघ्र दिया जाए:राज्य पैन्शनर्ज कल्याण संगठन

    किश्तों का एरियर भी शीघ्र दिया जाए:राज्य पैन्शनर्ज कल्याण संगठन

    अर्की

    राज्य पैन्शनर्ज कल्याण संगठन की अर्की ईकाई की बैठक ईकाई के प्रधान कृष्ण सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई । बैठक की जानकारी देते हुए इकाई के महासचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बैठक में सदस्यों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि मंहगाई भत्ते की 3 प्रतिशत किश्त की घोषणा किस आधार पर की गई है क्योंकि इससे पूर्व की 2 किश्तें जो 8 प्रतिशत बनती हैं जो अभी तक लम्बित हैं। सरकार से मांग की गई कि समस्त देय किश्तें शीघ्र जारी की जाएं तथा पूर्व में जारी की गई उन किश्तों का एरियर भी शीघ्र दिया जाए जो कि अभी तक लम्बित है। सदस्यों ने यह मांग भी रखी कि 1-1-2016 से 31-1-2022 के बीच सेवानिवृत्त पैन्शनर्ज का एरियर शीघ्र जारी किया जाए व लम्बित मैडिकल बिलों के निपटारे हेतु विभागों को समुचित बजट का शीघ्र आबंटन किया जाए। बैठक में महासचिव राजेन्द्र कुमार शर्मा के अतिरिक्त गोविंद राम वर्मा, रेवा शंकर, विजाराम ठाकुर, भगत राम, विनोद कुमार, किरण शर्मा, लेखराम शर्मा, गोपाल लाल सुमन, धनीराम, डाॅ हेतराम वर्मा, दौलत राम वर्मा तथा लेखराम ठाकुर भी उपस्थित रहे।