February 13, 2026 3:49 am

भगवान शिव परिवार से जुड़ी दिव्य कथाओं को सुन कर भक्ति रस से सराबोर हुआ पंडाल

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कुनिहार
अनादिकालीन शिव तांडव गुफा, कुनिहार में चल रही पावन शिव महापुराण कथा के नवम दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर आचार्य श्री बलवंत शांडील जी ने भक्तों को भगवान शिव परिवार से जुड़ी दिव्य कथाओं का भावपूर्ण वर्णन सुनाया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया।
आचार्य जी ने अपने प्रवचन में भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश जी के विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि दोनों दिव्य पुत्रों के विवाह के पीछे गहन आध्यात्मिक संकेत छिपे हैं—जहाँ कार्तिकेय वीरता और धर्म रक्षा के प्रतीक हैं, वहीं गणेश जी बुद्धि, सिद्धि और शुभता के अधिपति हैं। उनके विवाह प्रसंग से गृहस्थ जीवन की मर्यादा, कर्तव्य और संतुलन का संदेश मिलता है।
इसके पश्चात आचार्य जी ने तारकपुर के तीनों पुत्रों के वध की कथा सुनाते हुए बताया कि जब अधर्म और अहंकार बढ़ता है, तब ईश्वर स्वयं धर्म की स्थापना हेतु अवतार लेकर दुष्टों का संहार करते हैं। कथा में भगवान शिव की दिव्य लीला और देवताओं की सहायता का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से वातावरण को शिवमय बना दिया। आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला।
समापन संदेश:
आचार्य श्री बलवंत शांडील जी ने कहा कि शिव महापुराण की कथाएँ केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिव्य प्रेरणा हैं, जो मनुष्य को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की शिक्षा देती हैं।

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